कॉल

मौजूदा पॉलिसी के लिए

प्रीमियम, भुगतान या किसी सर्विसिंग आवश्यकता पर प्रश्न हैं?

हमें कॉल करें:

1 860 266 9966

सोमवार - शनिवार | 10 am - 7 pm IST

कॉल शुल्क लागू

समर्पित एनआरआई हेल्पडेस्क:

+91 22 6251 9966

सोमवार - शनिवार | 10 am - 7 pm IST

कॉल शुल्क लागू

नई पॉलिसी के लिए

क्या आप नई पॉलिसी ऑनलाइन खरीदना चाहते हैं?

हमें कॉल करें:

+91 22 6984 9300

कॉल बैक के लिए छूटी हुई कॉल दें:

+91 11 6615 8748

सोमवार - रविवार | 8 am - 11 pm IST

विशेष रूप से एनआरआई के लिए:

हमें कॉल करें:

+91 11 4473 0240

सोमवार - शनिवार | 9 am - 9 pm IST

कॉल बैक के लिए छूटी हुई कॉल दें:

+91 11 4473 0242

सोमवार - शनिवार | 9 am - 9 pm IST

भाषा

Back Arrow Icon
Close Button

शादीशुदा महिला संपत्ति अधिनियम (एमडब्ल्यूपी अधिनियम) के तहत टर्म इंश्योरेंस का महत्व

शादीशुदा महिला संपत्ति अधिनियम (एमडब्ल्यूपी अधिनियम) के तहत टर्म इंश्योरेंस का महत्व


टाटा एआईए टर्म% इंश्योरेंस प्लान्स के साथ अपने जीवनसाथी को वह वित्तीय सुरक्षा दें, जिसकी वह हकदार है.

टाटा एआईए टर्म% इंश्योरेंस प्लान्स के साथ अपने जीवनसाथी को वह वित्तीय सुरक्षा दें, जिसकी वह हकदार है.

  • महिलाओं के लिए बेहतर प्रीमियम दरें

  • महत्वपूर्ण पड़ावों पर लाइफ़ कवर बढ़ाएँ~

  • 46,800++ रुपये तक टैक्स# बचाएं

1 करोड़ लाइफ़ कवर प्राप्त करें
@रु. 424/माह$$

1 करोड़ लाइफ़ कवर प्राप्त करें
@रु. 424/माह$$

+91

टाटा एआईए लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड आपको अपनी पॉलिसी, नए प्रोडक्ट की&सर्विस, इंश्योरेंस सॉल्यूशन या इससे जुड़ी जानकारी के बारे में अपडेट भेजेगा. ऑप्ट-इन करने के लिए यहां चुनें.

 

जब आपका परिवार होता है, तो आपका लक्ष्य हमेशा उनके लिए पैसे उपलब्ध कराना होता है, ताकि वे अपनी सभी ज़रूरतें पूरी कर सकें. इसलिए, भले ही कुछ दुर्भाग्यपूर्ण हो जाए, आप यह सुनिश्चित करेंगे कि आपकी मृत्यु के बाद भी वे आराम से जीवन जी सकें. यह आपके परिवार के सभी सदस्यों के लिंग और उम्र के बावजूद है. हालांकि पहले भी कई ऐसे उदाहरण सामने आए हैं जहां विवाहित महिलाओं को उनके पति के घरों में किसी भी तरह के वित्तीय फायदों और अधिकारों से वंचित रखा गया है.

यह और भी गंभीर मुद्दा होगा अगर पति का निधन हो जाए, और अपनी पत्नी के लिए कुछ भी न छोड़ा जाए. इसके अलावा, भले ही महिला के नाम पर कुछ वित्त या संपत्ति हो, लेकिन उसके लिए अपने रिश्तेदारों, ससुराल वालों, या यहाँ तक कि अपने दिवंगत पति के लोन का पुनर्भुगतान करने वाले लेनदारों से भी इसकी सुरक्षा करने का कोई प्रावधान नहीं था.

इसलिए, विवाहित महिलाओं के वित्तीय अधिकारों को ध्यान में रखते हुए, 1874 में विवाहित महिला संपत्ति अधिनियम लागू किया गया था, ताकि महिलाएं अपनी संपत्ति की लेंडर्स, लेनदारों और रिश्तेदारों से सुरक्षा कर सकें. आइए, हमें एमडब्ल्यूपी अधिनियम के बारे में और जानकारी देते हैं.

अधिक जानकारी चाहिए?
हम आपकी मदद करेंगे

टाटा एआईए लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड आपको आपकी पॉलिसी, नए उत्पादों और सेवाओं, बीमा समाधान या संबंधित जानकारी पर अपडेट भेजेगा. ऑप्ट-इन करने के लिए यहां चुनें.

क्या आप एक नया प्लान लेना चाहते हैं ?
अभी हमसे जुड़ें

+91

टाटा एआईए लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड आपको आपकी पॉलिसी, नए उत्पादों और सेवाओं, बीमा समाधान या संबंधित जानकारी पर अपडेट भेजेगा. ऑप्ट-इन करने के लिए यहां चुनें.

विषय सूची

एमडब्ल्यूपी अधिनियम क्या है?


विवाहित महिलाओं की संपत्ति (एमडब्ल्यूपी) 1874 के अधिनियम में कहा गया था कि भारत में एक विवाहित महिला की संपत्ति या कमाई को उसकी अपनी अलग संपत्ति माना जाएगा. हालांकि 1923 में एमडब्ल्यूपी अधिनियम में एक लाइफ इंश्योरेंस संशोधन जोड़ा गया, जिससे विवाहित महिला को अपने पति के निधन की स्थिति में इंश्योरेंस पॉलिसी का बेनिफिट मिलना संभव हो गया.

संशोधन के अनुसार, पति द्वारा ली गई इंश्योरेंस पॉलिसी से होने वाली इनकम अन्य संस्थाओं जैसे लेनदारों और उधार देने वालों, किसी भी रिश्तेदार या यहां तक कि पति या उसकी संपत्ति के नियंत्रण के अधीन नहीं होगी. डेथ बेनिफिट या मैच्योरिटी बेनिफिट का क्लेम सिर्फ़ विवाहित महिला द्वारा किया जाएगा, अगर पति ने एमडब्ल्यूपी अधिनियम के तहत लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदी हो.

इसलिए, जहाँ सामान्य लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसियों में ऐसा कोई क्लॉज़ नहीं होता है, एमडब्ल्यूपी प्रावधान के तहत पति द्वारा खरीदा गया लाइफ़ इंश्योरेंस प्लान यह सुनिश्चित करेगा कि इंश्योरेंस पॉलिसी से प्राप्त होने वाली कमाई के हकदार सिर्फ़ उसकी पत्नी या बच्चे ही हैं. इन बेनिफिट्स का उपयोग उसकी मृत्यु के बाद उसके लोन या अन्य न चुकाए गए लोन को चुकाने के लिए भी नहीं किया जा सकता है.


एमडब्ल्यूपी अधिनियम मेरे परिवार की रक्षा कैसे करता है?

लाइफ इंश्योरेंस प्लान ऐसे समय में आपके परिवार की सुरक्षा करने के लिए होता है, ताकि आप उन्हें वित्तीय सहायता प्रदान कर सकें. आपके निधन के बाद, इंश्योरेंस पॉलिसी का डेथ बेनिफिट, जो कुल बीमा राशि (सम अश्योर्ड) है, का भुगतान आपके नॉमिनी/ओं को कर दिया जाता है, ताकि वे आपकी अनुपस्थिति में भी अपने वित्तीय दायित्वों और लक्ष्यों को पूरा करना जारी रख सकें.

हालाँकि, ऐसी संभावना हो सकती है कि आपने अपने जीवनकाल में कुछ लोन लिए हों. अगर आपके असामयिक निधन से पहले इनका भुगतान नहीं किया जाता है, तो आपके परिवार को इन लोन्स और डेब्ट्स की ज़िम्मेदारी उठानी होगी. हो सकता है कि आपके लेनदार और उधर देने वाले भी अपने लोन का निपटान करने के लिए आपके इंश्योरेंस बेनिफ्ट्स का क्लेम करना चाहें.

इसके अलावा, जब आपके परिवार की बात आती है, तो ऐसे रिश्तेदार भी हो सकते हैं, जिन्हें लाइफ इंश्योरेंस प्लान से मिलने वाले आर्थिक फ़ायदों का हिस्सा चाहिए. ऐसे मामलों में, एमडब्ल्यूपी अधिनियम के तहत, आप यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि सिर्फ़ आपकी पत्नी और बच्चे ही यह बेनिफिट पाने के हकदार हैं. यहां बताया गया है कि एमडब्ल्यूपी अधिनियम आपके परिवार की सुरक्षा कैसे करता है:

  • लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदते समय, यह सुनिश्चित कर लें कि सिर्फ़ आपकी पत्नी और बच्चे ही प्लान के दायरे में आते हैं. आप ऐसा एमडब्ल्यूपी मैंडेट के साथ पॉलिसी खरीदते समय उन्हें बेनिफिशियरी के रूप में जोड़कर कर सकते हैं, जिसे बदला नहीं जा सकता. एमडब्ल्यूपी अधिनियम, 1874 के तहत लाइफ इंश्योरेंस कराना पॉलिसीहोल्डर्स के लिए मान्य है, चाहे वे किसी भी धर्म के हों.

  • एक पॉलिसीहोल्डर के तौर पर, आप अपनी इंश्योरेंस पॉलिसी के बेनिफिट्स को अपने बेनिफिशियरी में समान रूप से या प्रतिशत के आधार पर विभाजित करना चुन सकते हैं या पूरी राशि किसी एक नॉमिनी को दे सकते हैं. हालाँकि, इस एलोकेशन का प्लान और निर्णय एमडब्ल्यूपी अधिनियम के तहत पॉलिसी खरीदते समय किया जाना चाहिए और बाद में ये बदलाव करने का कोई प्रावधान नहीं है.

  • आपको अपने नॉमिनी लोगों के लिए अलग से ट्रस्ट फ़ंड सेट करने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि बीमा पॉलिसी एमडब्ल्यूपी अधिनियम , 1874 के तहत एक ट्रस्ट के तौर पर काम करेगी. आप अपने नॉमिनी के लिए किसी ट्रस्टी से पॉलिसी मैनेज करवाने का विकल्प चुन सकते हैं, लेकिन यह वैकल्पिक प्रावधान है क्योंकि पॉलिसी से होने वाले फायदों के लिए सिर्फ़ ट्रस्टी ही क्लेम फाइल कर सकते हैं. ज़रूरत पड़ने पर, आप अपनी पत्नी का नाम ट्रस्टी और नॉमिनी के तौर पर रख सकते हैं, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि फ़ायदों का गलत इस्तेमाल न हो.

  • एमडब्ल्यूपी के तहत इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने पर, इसमें केवल एक टाइटल होगा, जिसका मतलब है कि नॉमिनी की ओर से काम करने वाला कोई अन्य व्यक्ति फ़ायदे का क्लेम नहीं कर पाएगा. यह प्रावधान यह सुनिश्चित करता है कि इंश्योरेंस से मिलने वाली राशि को सिर्फ़ आपके द्वारा चुना गया नॉमिनी एक्सेस कर सकता है.

  • आपके रिश्तेदार या लेनदार इस अधिनियम के तहत आपकी पत्नी और बच्चों के लिए ली गई पॉलिसी के फायदों का क्लेम नहीं कर सकते. पॉलिसी से होने वाली कमाई का फ़ायदा सिर्फ़ आपके नॉमिनी लोगों को मिल सकता है.

  • अगर आप सैलरी लेने वाले व्यक्ति या बिजनेस मैन हैं, जिसके पास बकाया लोन या डेब्ट्स है, तो इंश्योरेंस बेनिफिट्स पर आपके लेनदारों का पहला अधिकार हो सकता है. हालाँकि, लेनदारों के ये क्लेम इस अधिनियम के तहत सभी पॉलिसियों पर लागू नहीं होते हैं और आपके नॉमिनी लोगों को इस फ़ायदे के लिए विशेष अधिकार मिलते रहेंगे.

  • अगर संयुक्त परिवार या हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) में पारिवारिक विवाद हैं, तो एमडब्ल्यूपी प्रावधान इस अधिनियम के तहत एक टर्म पॉलिसी के साथ आपकी पत्नी और बच्चों के वित्तीय हितों की रक्षा करेगा. इस तरह, भले ही आपकी पत्नी और बच्चों को परिवार की संपत्ति का कोई हिस्सा न मिले, फिर भी उन्हें एमडब्ल्यूपी अधिनियम के तहत कवर की जाने वाली पॉलिसी से मिलने वाली कमाई की मदद मिलेगी. हालाँकि, ध्यान दें कि ऐसी इंश्योरेंस पॉलिसी को आपके संयुक्त परिवार की संपत्ति का हिस्सा नहीं माना जाता है.


हमारे सबसे ज़्यादा बिकने वाले टर्म इंश्योरेंस प्लान के बारे में जानें — टाटा एआईए सम्पूर्ण रक्षा सुप्रीम 

नॉन-लिंक्ड नॉन-पार्टिसिपेटिंग इंडिविजुअल लाइफ इंश्योरेंस प्लान (UIN:110N160V03)
 

टाटा एआईए

सम्पूर्ण रक्षा सुप्रीम

मुख्य विशेषताएंः
 
  • 100 वर्ष की आयु तक लाइफ कवर पाएं*

  • महत्वपूर्ण पड़ावों पर लाइफ कवर बढ़ाएं~

  • 46,800++ रुपये तक टैक्स बचाएं


आप एमडब्ल्यूपी अधिनियम के तहत टर्म इंश्योरेंस कैसे ख़रीदते हैं?
 

यदि आप एमडब्ल्यूपी अधिनियम के तहत टर्म इंश्योरेंस प्लान खरीदना चाहते हैं, तो यह प्रक्रिया काफी सरल और सुविधाजनक है, जो रेगुलर टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने के समान है. आप इस तरह से यह कर सकते हैं:

सबसे पहले, आपको अपने इंश्योरेंस प्रोवाइडर से अपनी पसंद का टर्म इंश्योरेंस प्लान खरीदना होगा.

एक बार आपका काम पूरा हो जाने के बाद, आपको इंश्योरेंस प्रपोजल फॉर्म भरना होगा.

एक धारा के तहत, आपसे यह चुनने के लिए कहा जाएगा कि आप एमडब्ल्यूपी अधिनियम के तहत टर्म इंश्योरेंस खरीद रहे हैं या नहीं. अपने उत्तर के तौर पर “हां” चुनें.

इसके बाद, नॉमिनी को उनके नाम, जन्म की तारीख, आपसे उनका संबंध और उन्हें दिए जाने वाले फायदों का प्रतिशत जैसी जानकारी दें.


ध्यान दें कि आप इस अधिनियम के तहत नॉमिनी के तौर पर सिर्फ़ अपनी पत्नी और बच्चों का मेंशन कर सकते हैं और इस विकल्प को चुनने के बाद, आप नॉमिनी के रूप में परिवार के अन्य सदस्यों का नाम नहीं दे सकते हैं.


एमडब्ल्यूपी अधिनियम का विकल्प किसे चुनना चाहिए?
 

अगर आप विवाहित आदमी हैं, तो आप अपनी पत्नी और बच्चों के लिए एमडब्ल्यूपी अधिनियम के तहत लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीद सकते हैं. इसी तरह, अगर आप एक विवाहित महिला हैं, तो आप अपने बच्चों के वित्तीय भविष्य की सुरक्षा के लिए इस अधिनियम के तहत पॉलिसी का विकल्प चुन सकते हैं. हालांकि यह प्रावधान सिर्फ विवाहित पार्टनर तक ही सीमित नहीं है. यहां तक कि एक विधुर या तलाकशुदा के रूप में, आप अधिनियम के तहत एक लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी का चयन कर सकते हैं. इस अधिनियम के तहत किसे पॉलिसी लेने का विकल्प चुनना चाहिए, इसकी लिस्ट नीचे दी गई है:

  • लोन लेने वाला सैलरीड व्यक्ति
  • एक बिजनेस का मालिक जिसने लोन ले रखा है
  • संयुक्त परिवार का सदस्य
  • हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) का सदस्य
  • कोई भी व्यक्ति जो अस्थिर इनकम पर जी रहा हो
     

इस अधिनियम के तहत इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदकर, आप अपने परिवार को अपने डेब्ट्स और लोन के बोझ से बचा सकते हैं और अगर पॉलिसी अवधि खत्म होने से पहले आपकी असमय मृत्यु हो जाती है, तो उनकी वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं.

एमडब्ल्यूपी अधिनियम एक्ट में आपको एक ट्रस्टी भी जोड़ना होगा, जो लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी का मुख्य बेनिफिशियरी हो. ट्रस्टी की ज़िम्मेदारी है कि वह असली बेनिफिशियरी, जो आपकी पत्नी और आपके बच्चे हैं, के लिए पॉलिसी को मैनेज करे.

ट्रस्टी जोड़ते समय, यह सुनिश्चित कर लें कि उनकी आयु 18 वर्ष से अधिक हो और ट्रस्टी के तौर पर उल्लेख किए जाने पर उनकी सहमति एमडब्ल्यूपी पूरक दस्तावेज़ में दर्ज कर ली गई हो. आप पॉलिसी अवधि के दौरान अपनी पसंद के हिसाब से किसी ट्रस्टी को जोड़ सकते हैं, हटा सकते हैं या बदल सकते हैं.
 

  • एमडब्ल्यूपी अधिनियम, 1874 के तहत इंश्योरेंस में बेनिफिशियरी के तौर पर आप किसका नाम दे सकते हैं?

    विवाहित महिलाओं के संपत्ति के अधिकारों और वित्तीय अधिकारों की सुरक्षा के लिए विवाहित महिला संपत्ति अधिनियम, 1874 लाया गया था. चूंकि लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसियों को भी इस अधिनियम के तहत संपत्ति माना जाता है, इसलिए इस अधिनियम के तहत कवर किए गए इंश्योरेंस प्लान की मदद से अपनी पत्नी और अपने बच्चों की सुरक्षा करना संभव है. इस तरह आप अपने जीवनसाथी और अपने बच्चों को नॉमिनेट कर सकते हैं:

    केवल आपके बच्चे / बच्चों के लिए सुरक्षा

    अगर आप चाहते हैं कि सिर्फ़ आपके बच्चों को ही पॉलिसी के फ़ायदे मिलें, तो आप अपने बच्चों के नाम बता सकते हैं और उनसे होने वाली कमाई को उनके बीच बांट सकते हैं. फिर, भविष्य में, पॉलिसी से मिलने वाले फायदों की मदद से आपके बच्चे और उनकी शिक्षा संबंधी इच्छाओं, करियर और रोज के खर्चे पूरे कर सकते हैं.

    आपकी पत्नी और बच्चों के लिए सुरक्षा

    पॉलिसी के फ़ायदों को आपकी पत्नी और आपके बच्चे या बच्चों के बीच भी बांटा जा सकता है. और नॉमिनी की भविष्य की ज़रूरतों के आधार पर कुल कवर को प्रतिशत के आधार पर विभाजित किया जा सकता है. अगर आपके बच्चे काफी छोटे हैं, तो आप अपनी पत्नी को बड़ा हुस्सा दे सकते हैं, ताकि वह उनकी शिक्षा से जुड़ी ज़रूरतों के साथ-साथ घर के खर्चों को भी संभाल सके.

    केवल आपकी पत्नी के लिए सुरक्षा

    अगर आपके बच्चे नहीं हैं या वे बड़े हो गए हैं और अच्छी कमाई कर रहे हैं, तो आप सिर्फ़ अपनी पत्नी को नॉमिनेट करना चुन सकते हैं और अगर आपकी असमय मृत्यु हो जाती है, तो टर्म इंश्योरेंस प्लान से मिलने वाली पूरी राशि उन्हें डेथ बेनिफ़िट के तौर पर मिलेगी. इस तरह, वह लोन या फाइनेंशियल इनकम के किसी अन्य स्रोत पर निर्भर हुए बिना अपना भरण-पोषण कर पाएंगे.


एमडब्ल्यूपी के तहत लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी कैसे प्राप्त करें?

जैसा कि पहले इस धारा में बताया गया है, आप अपनी इंश्योरेंस पॉलिसी के बेनफिस्ट को अपनी पत्नी और बच्चों, अपने सभी बच्चे/सिर्फ बच्चे के बीच बांटना चुन सकते हैं या सिर्फ़ अपनी पत्नी को नॉमिनेट कर सकते हैं.

आप ऐसा सेविंग प्लान या एंडोमेंट प्लान, लाइफ़ इंश्योरेंस पॉलिसी लेने का विकल्प भी चुन सकते हैं, जिसे एमडब्ल्यूपी द्वारा कवर किया गया हो. यह प्रोसेस अपनी पत्नी और बच्चों के लिए टर्म इंश्योरेंस प्लान खरीदने जैसा ही है, यहाँ बताया गया है कि जब बेनिफिट एलोकेट करने की बात आती है तो यह कैसे अलग होता है:

अगर आप अपनी सेविंग या एंडोमेंट पॉलिसी को सरेंडर करना चुनते हैं, तो सरेंडर से आपको जो भी फ़ायदे मिलेंगे, वे पॉलिसी में नामित बेनिफिशियरी को मिलेंगे. चूंकि एक सेविंग प्लान में मैच्योरिटी बेनिफिट मिलते हैं, इसलिए इन फायदों का भुगतान आपके बेनिफिशियरी को तब किया जाएगा, जब आप अवधि पूरी कर लेंगे और आपको फ़ायदे मिलेंगे. ऐसे सेविंग प्लान के तहत जो एक्ट के तहत कवर नहीं किया गया है, सरेंडर वैल्यू का भुगतान आपको किया जाएगा, जबकि पॉलिसी की अवधि पूरी होने पर आपको मैच्योरिटी बेनिफिट्स का भुगतान भी किया जाता है.


एमडब्ल्यूपी अधिनियम के फ़ायदे

जबकि एमडब्ल्यूपी अधिनियम का उद्देश्य मुश्किलों की स्थिति में अपनी पत्नी और बच्चों की सुरक्षा करना है, यहाँ अधिनियम के कुछ फ़ायदे दिए गए हैं जिनसे आपको अवगत होना चाहिए:

बेनिफिट

  • इस अधिनियम के तहत इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने पर, अधिनियम के प्रावधानों के मुताबिक आपके परिवार की सुरक्षा की जाएगी.
  • भारत में यह अधिनियम सभी विवाहित महिलाओं पर लागू होता है, चाहे वे किसी भी जाति और धर्म की हों.
  • एमडब्ल्यूपी अधिनियम महिलाओं को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करके सशक्त बनाता है यदि उनका जीवनसाथी उनके निधन या तलाक के कारण उनकी देखभाल नहीं कर सकता है.
  • इस अधिनियम के तहत इंश्योरेंस प्लान से होने वाले डेथ बेनिफिट सिर्फ़ आपकी पत्नी और बच्चों के वित्तीय हितों की रक्षा करने के लिए जाएँगे और इसका किसी भी तरह से दुरुपयोग नहीं किया जाएगा.
  • आपको अपनी पत्नी और बच्चों के लिए अलग से ट्रस्ट फंड बनाने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि अधिनियम यह सुनिश्चित करता है कि उन्हें आपकी इंश्योरेंस पॉलिसी के फ़ायदे मिलेंगे.


एमडब्ल्यूपी अधिनियम में अधिनियमित अन्य कानून कौन से हैं?

ये कुछ अन्य कानून हैं जो एमडब्ल्यूपी अधिनियम द्वारा लागू किए गए हैंः

  • इंश्योरेंस चुनने का अधिकार

    एमडब्ल्यूपी अधिनियम से विवाहित महिलाएं एक स्वतंत्र लाइफ़ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीद सकती हैं और मालिक बन सकती हैं. शादी के बाद, हो सकता है कि किसी महिला को इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने के लिए अपने पति पर निर्भर न रहना पड़े. महिला द्वारा खरीदी गई पॉलिसी के फायदों के बारे में ही क्लेम किया जा सकता है. यह काफी हद तक एक अविवाहित महिला के समान है, जो लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी की मालिक है, क्योंकि अधिनियम से पहले, विवाहित महिलाएं स्वतंत्र कॉन्ट्रैक्ट नहीं रख सकती थीं.

  • कमाई पर मालिकाना हक

    विवाहित महिलाओं के संपत्ति कानूनों के मुताबिक, एक विवाहित महिला की कमाई उसकी खुद की संपत्ति होती है. अगर उनकी कमाई उसके पति की कमाई से अलग है, तो वह किसी भी व्यापार या व्यवसाय को आगे बढ़ा सकती है और कमाई उसकी एकमात्र संपत्ति होगी. इसलिए, उनके पति या कोई अन्य संस्था उनकी संपत्ति या कमाई पर कोई क्लेम नहीं कर सकती है, जिसमें उनकी सेविंग या अलग-अलग तरीकों से किए गए निवेश भी शामिल हैं. इस अधिनियम के तहत ये सभी उसकी कानूनी रूप से संरक्षित संपत्ति हैं.

  • कानूनी कार्यवाही शुरू करना

    अगर कोई महिला कानूनी कार्यवाही शुरू करना चाहती है तो एमडब्ल्यूपी अधिनियम उसे ऐसा करने का अधिकार देता है और सक्षम बनाता है. यह प्रावधान महिलाओं को उनकी अलग संपत्ति की वसूली के लिए स्वतंत्र रूप से कानूनी मदद लेने में मदद करने के लिए बनाया गया था, चाहे वह भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम के तहत या विवाहित महिला संपत्ति अधिनियम के तहत हासिल की गई हो. कानून महिला को अपना मालिकाना हक हासिल करने के लिए सिविल या क्रिमिनल कार्यवाही शुरू करने की अनुमति देता है.

  • विवाहित महिला के लिए इंश्योरेंस

    इससे पहले, अधिनियम लागू होने से पहले, अगर किसी विवाहित व्यक्ति का लोन चुकाए बिना निधन हो जाता है, तो उसके लेनदार उसकी संपत्ति पर क्लेम करेंगे, जिसमें लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के बेनिफिट भी शामिल हैं. हालाँकि, अधिनियम की धारा 6 के जरिए, इस अधिनियम के तहत आदमी द्वारा ली गई लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी से मिलने वाली कमाई सिर्फ़ उसकी पत्नी और/या बच्चों के पास जाती है और उसके लेनदारों द्वारा उस पर क्लेम नहीं किया जा सकता.

  • विश्वास के उल्लंघन के लिए पति की ज़िम्मेदारी

    एमडब्ल्यूपी में पति की ज़िम्मेदारी के बारे में भी बताया गया है, जब उसकी पत्नी को लाइफ़ इंश्योरेंस पॉलिसी के बेनिफिशियरी और ट्रस्टी के रूप में नॉमिनेट किया जाता है. प्रावधान के अनुसार, चूंकि पति के पास फायदों पर कोई क्लेम नहीं है या लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के मैनेजमेंट में शामिल नहीं है, इसलिए वह अपनी पत्नी द्वारा विश्वास भंग होने की स्थिति में या उसके द्वारा इनकम का दुरुपयोग होने पर उत्तरदायी नहीं हो सकता है.

  • शादी से पहले के डेब्ट्स के लिए पति की देनदारी

    अधिनियम में इस बारे में भी चर्चा की गई है कि कैसे शादी से पहले अपनी पत्नी द्वारा न चुकाए गए डेब्ट्स के लिए पति को उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता है. अगर कोई अविवाहित महिला क्रेडिट या लोन लेती है, तो शादी के बाद भी लोन का भुगतान न करने पर उस पर मुकदमा चलाने की उसकी देनदारी एक अविवाहित महिला की तरह ही रहेगी. इसलिए, यदि पति ना चाहे तो शादी के बाद लोन चुकाने के लिए उत्तरदायी नहीं होता है.

  • शादी के बाद के लोन्स के लिए देयता

    एमडब्ल्यूपी अधिनियम 1874 में एक विवाहित महिला के अधिकारों को सूचीबद्ध करने के साथ-साथ उसकी सभी देनदारियों को भी सूचीबद्ध किया गया है. इस स्थिति में, अगर कोई विवाहित महिला अपनी संपत्ति के संबंध में कोई कॉन्ट्रैक्ट या एग्रीमेंट दर्ज करने का विकल्प चुनती है और अपने पुनर्भुगतान को बरकरार नहीं रखती है, तो कॉन्ट्रैक्ट में शामिल दूसरा व्यक्ति नुकसान के लिए उस पर मुकदमा कर सकता है, जैसे कि नुकसान के लिए एक विवाहित महिला पर मुकदमा चलाना.


टर्म इंश्योरेंस प्रीमियम को कैलकुलेट करें

अपने टर्म इंश्योरेंस प्रीमियम की कैलकुलेशन करने और अप्रत्याशित घटनाओं से अपने परिवार की सुरक्षा के लिए हमारे ऑनलाइन टर्म कैलकुलेटर का उपयोग करें.

एमडब्ल्यूपी अधिनियम के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अगर एमडब्ल्यूपी अधिनियम के तहत कोई लाइफ़ इंश्योरेंस प्लान लिया जाता है, तो क्या मुझे पॉलिसी पर लोन मिल सकता है?

एक सामान्य लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी से आप पॉलिसी पर लोन ले सकते हैं, लेकिन आप एमडब्ल्यूपी अधिनियम के तहत अपनी लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी पर लोन नहीं ले पाएंगे. अगर आपकी असामयिक मृत्यु हो जाती है और लोन्स पेंडिंग रह जाते हैं, तो ऐसी स्थिति आपकी पत्नी और बच्चों को लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी द्वारा दी जाने वाली सुरक्षा को खतरे में डाल सकती है. यही वजह है कि इस अधिनियम के तहत कोई पॉलिसी लोन सुविधा को सक्षम नहीं करती है.

क्या एमडब्ल्यूपी अधिनियम के तहत एक से ज़्यादा लाइफ़ इंश्योरेंस प्लान खरीदना संभव है?

हाँ, विवाहित महिलाओं के संपत्ति कानून के तहत आपके पास एक से अधिक लाइफ इंश्योरेंस प्लान हो सकते हैं. हालाँकि, यह सुनिश्च्ति कर लें कि आप अपनी ख़रीदी हुई पॉलिसीज़ के प्रीमियम का भुगतान कर सकें, ताकि पॉलिसी प्रभावी हो और ज़रूरत पड़ने पर आपकी पत्नी और बच्चों को इसके फ़ायदे मिल सकें.

अगर मेरी पत्नी का निधन मुझसे पहले हो जाता है, तो लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी का क्या होगा?

अगर आपकी पत्नी, जो लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी की बेनिफिशियरी है, का निधन आपसे पहले ही हो जाता है, तो पॉलिसी के फ़ायदे आपके कानूनी वारिस के पास जाएंगे. अगर आपकी पत्नी ऐसा नहीं करती है, तो यह वह व्यक्ति है जिसे पॉलिसी बेनिफिट मिल सकते हैं.

क्या कोई ऐसी पॉलिसी सरेंडर कर सकता है जो एमडब्ल्यूपी अधिनियम के तहत ली गई हो?

हाँ, ज़रूरत पड़ने पर आप अपनी लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी सरेंडर कर सकते हैं, जो विविहित महिलाओं के संपत्ति कानून के तहत आती है. हालाँकि, बेनिफिशियरी को इस प्रक्रिया के बारे में सूचित किया जाना चाहिए और पॉलिसी पर उनके हस्ताक्षर मौजूद होने चाहिए. पॉलिसी सरेंडर करने के बाद, आपको फायदे प्राप्त होगा, जिसका उपयोग आपके बेनिफिशियरी को फ़ायदे के लिए किया जाएगा.

क्या तलाक की स्थिति में इस अधिनियम के तहत पॉलिसी के बेनिफिशियरी को बदला जा सकता है?

नहीं, पॉलिसी खरीदते समय आपने जो बेनिफिशियरी चुना है, उसे बदला नहीं जा सकता. अगर नॉमिनी आपकी पत्नी है, तो स्थिति आने पर उसे पॉलिसी के बेनिफिट मिलेंगे.

क्या मैं एमडब्ल्यूपी अधिनियम के तहत ली गई पॉलिसी के तहत अपने माता-पिता को नॉमिनी के तौर पर जोड़ सकता/सकती हूँ?

नहीं, एमडब्ल्यूपी अधिनियम में सिर्फ़ आपकी पत्नी और बच्चों के लिए प्रावधान है. आप इस अधिनियम के तहत लिए गए लाइफ़ इंश्योरेंस प्लान के तहत अपने माता-पिता, रिश्तेदार या परिवार के किसी अन्य सदस्य को कवर नहीं कर सकते.

अगर मेरी पत्नी के पास हमारी शादी से पहले का लोन है जिसे चुकाया नहीं है, तो क्या मुझे उन्हें चुकाना होगा?

नहीं, एमडब्ल्यूपी प्रावधान के तहत, पति शादी से पहले से पत्नी के बकाया लोन का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं है, जब तक कि वह ऐसा करने का विकल्प नहीं चुनता. इसलिए, अगर आपकी पत्नी पर क्रेडिट का भुगतान न करने या उसके द्वारा लिए गए लोन का मुकदमा चलाया जाता है, तो यह अधिनियम आपको इसके लिए उत्तरदायी ठहराए जाने से बचाएगा.

क्या ट्रस्टी और बेनिफिशियरी के रूप में मेरी पत्नी को जोड़ना संभव है?

आपकी अनुपस्थिति में आपकी ओर से पॉलिसी को मैनेज करने के लिए एमडब्ल्यूपी अधिनियम के तहत एक ट्रस्टी को इंश्योरेंस पॉलिसी में जोड़ा जाता है. अगर आप अपनी पत्नी का नाम ट्रस्टी के साथ-साथ नॉमिनी के तौर पर रखना चाहते हैं, तो आपको यह करने की अनुमति है. कई मामलों में, लाइफ़ इंश्योरेंस प्लान में किसी तीसरे व्यक्ति को शामिल करने के बजाय ट्रस्टी और नॉमिनी को एक ही व्यक्ति के तौर पर रखना सुरक्षित माना जाता है.

क्या मेरी पत्नी अपना लाइफ इंश्योरेंस खुद खरीद सकती है और अपनी संपत्ति का फ़ायदा उठा सकती है?

हाँ, आपकी पत्नी भी एमडब्ल्यूपीके तहत शादी के बाद स्वतंत्र रूप से लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीद सकती है. कमाई और फायदों का क्लेम सिर्फ़ अपनी एकमात्र संपत्ति के तौर पर ही करेगी. अगर उनकी मृत्यु हो जाती है, तो वे अपनी सुविधानुसार नॉमिनी चुन सकती हैं. डेथ या मैच्योरिटी बेनिफिट्स का इस्तेमाल आपके किसी भी लोन का भुगतान करने के लिए नहीं किया जाएगा या आपके रिश्तेदारों द्वारा क्लेम नहीं किया जाएगा.

अगर मेरी इंश्योरेंस पॉलिसी सर्वाइवल बेनिफिट देती है, तो मैच्योरिटी पर मिलने वाले बेनिफिट के लिए कौन पात्र होगा?

अगर आपने एमडब्ल्यूपी अधिनियम के तहत कोई सेविंग प्लान या एंडोमेंट प्लान खरीदा है, तो मैच्योरिटी से होने वाली राशि आपके नॉमिनी के पास जाएगी. यह एक रेगुलर सेविंग प्लान के विपरीत है, जहाँ अगर आप पॉलिसी अवधि तक जीवित रहते हैं, तो आप इस बेफिट का फायदा ले सकते हैं.

अस्वीकरण

  • टाटा एआईए सम्पूर्ण रक्षा सुप्रीम का पूरा नाम टाटा एआईए लाइफ़ इंश्योरेंस सम्पूर्ण रक्षा सुप्रीम (UIN:110N160V03) है - नॉन-लिंक्ड नॉन-पार्टिसिपेटिंग इंडिविजुअल लाइफ़ इंश्योरेंस प्लान
  • *खास प्लान विकल्पों के लिए लागू. कृपया अतिरिक्त जानकरी के लिए ब्रोशर देखें.
  • ~खास प्लान विकल्पों के लिए लागू. कृपया अतिरिक्त जानकरी के लिए ब्रोशर देखें.
  • ++धारा 80C के तहत ₹46,800 तक के टैक्स बेनिफिट की कैलकुलेशन ₹1,50,000 के लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम पर 31.20% (सरचार्ज को छोड़कर सेस सहित) की उच्चतम टैक्स स्लैब दर पर की जाती है. पॉलिसी के तहत टैक्स बेनिफिट धारा 80C, 80D,10 (10D), 115BAC और इनकम टैक्स अधिनियम, 1961 के अन्य लागू प्रावधानों के तहत रखी गई शर्तों के अधीन हैं. अगर गुड्स और सर्विस टैक्स और सेस में से कुछ लागू होता है तो मौजूदा दरों के अनुसार अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा. टैक्स फ्री इनकम धारा 10 (10D) और इनकम टैक्स अधिनियम, 1961 के अन्य लागू प्रावधानों के तहत निर्दिष्ट शर्तों के अधीन है. टैक्स कानून समय-समय पर किए गए संशोधनों के अधीन हैं. उपरोक्त पर कार्रवाई करने से पहले, पूरी जानकारी के लिए कृपया अपने कर सलाहकार से सलाह लें.
  • +विनर लाइफ़ इंश्योरेंस - टर्म प्लान कैटेगरी. NielseniQ द्वारा सभी कैटेगरी के 2250 लोगों का सर्वे.
  • %इस प्लान में लाइफ़ ऑप्शन के तहत प्योर रिस्क कवर और लाइफ़ प्लस ऑप्शन के तहत रिटर्न ऑफ़ प्रीमियम बेनिफिट की सुविधा मिलती है. इस प्लान में अतिरिक्त विकल्प भी उपलब्ध हैं. कृपया पूरी जानकारी के लिए सेल्स ब्रोशर को देखें.
  • #मौजूदा इनकम टैक्स कानूनों के अनुसार, इनकम टैक्स बेनिफिट मिलेंगे, बशर्ते कि उसमें निर्धारित शर्तें पूरी की जाएं. इनकम टैक्स कानून बदलाव के अधीन हैं. टाटा एआईए लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड इस दस्तावेज़ में कहीं भी बताए गए टैक्स संबंधी प्रभाव के लिए ज़िम्मेदारी नहीं लेती है. आपके लिए उपलब्ध टैक्स बेनिफिट के बारे में जानने के लिए कृपया अपने टैक्स सलाहकार से सलाह लें.
  • $$इलस्ट्रेटेड प्रीमियम मंथली प्रीमियम है, जिसमें लाइफ ऑप्शन के तहत 20 साल की महिलाओं, स्टैंडर्ड लाइफ, नॉन-स्मोकर के लिए 1 करोड़ की बीमा राशि (सम अश्योर्ड) के साथ 20 साल की पॉलिसी अवधि (रेगुलर पे) के साथ टैक्स शामिल नहीं है. अधिक जानकारी के लिए कृपया बेनिफिट इलस्ट्रेशन देखें. प्रीमियम पर लागू टैक्स, सेस, &लेवी लागू होते हैं, जो कि ऐसे प्रीमियम के भुगतान के अलावा पॉलिसीधारक द्वारा पूरी तरह से भुगतान/वहन किया जाएगा. टाटा एआईए लाइफ के पास पॉलिसी के तहत देय फायदों में से, किसी भी वैधानिक या प्रशासनिक निकाय द्वारा लगाए गए किसी भी टैक्स या आरोपण की राशि का दावा करने, कटौती करने, उसमें बदलाव करने, उसे वापस लेने का अधिकार है. सटीक प्रीमियम के लिए कृपया सेल्स इलस्ट्रेशन देखें.
  • इस प्रोडक्ट को टाटा एआईए लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड द्वारा अंडरराइट किया गया है.
  • यह प्लान गारंटीड़ जारी किया गया प्लान नहीं है और यह कंपनी की अंडरराइटिंग और स्वीकृति के अधीन होगा.
  • इस प्रॉडक्ट के तहत इंश्योरेंस कवर उपलब्ध है.
  • जोखिम वाले कारकों, नियमों और शर्तों के बारे में ज़्यादा जानकारी के लिए कृपया खरीदने से पहले सेल्स ब्रोशर को ध्यान से पढ़ें. इस प्लान के सटीक नियम और शर्तें पॉलिसी कॉन्ट्रैक्ट में बताई गई हैं.
  • लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदना लंबी अवधि की प्रतिबद्धता है. आमतौर पर समय से पहले पॉलिसी खत्म होने पर कम राशि मिलती है, और देय सरेंडर वैल्यू भुगतान किए गए सभी प्रीमियमों से कम हो सकती है.
  • नॉन-स्टैंडर्ड जीवन के मामले में और नॉन-स्टैंडर्ड आयु प्रमाण जमा करने पर, हमारे अंडरराइटिंग दिशानिर्देशों के अनुसार अतिरिक्त प्रीमियम लिया जाएगा.
  • यह पब्लिकेशन केवल सामान्य सर्कुलेशन के लिए है. यह दस्तावेज़ केवल जानकारी और उदाहरण के लिए है और यह किसी वित्तीय या निवेश सेवाओं के लिए अभिप्राय नहीं रखता है और किसी ऑफ़र या सुझाव का हिस्सा नहीं है. यह दस्तावेज़ निवेश सलाह या किसी खास सुरक्षा या कार्रवाई के संबंध में सिफारिश के तौर पर नहीं है और न ही इस पर विचार किया जाना चाहिए. 
  • L&C/Advt/2023/Jun/1701
crossImg

क्या आप नया इंश्योरेंस प्लान खरीदना चाहते हैं?

मौजूदा ग्राहक हैं?

और

हमारे एक्सपर्ट आपकी सहायता करेंगे

+91

टाटा एआईए लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड आपको आपकी पॉलिसी, नए उत्पादों और सेवाओं, बीमा समाधान या संबंधित जानकारी पर अपडेट भेजेगा. ऑप्ट-इन करने के लिए यहां चुनें.

आपकी जानकारी सफलता पूर्वक सबमिट कर दी गई हैं.

टाटा एआईए लाइफ इंश्योरेंस का प्रतिनिधि जल्द ही आपसे संपर्क करेगा.