अपनी सैलरी पर टैक्स बचाना सीखें
27-मई-2021 |
आप महीने भर कड़ी मेहनत करते हैं और आखिर में सैलरी मिल जाती है. हालाँकि, आपको सेलरी पर इनकम टैक्स के रूप में एक महत्वपूर्ण राशि का भुगतान करना पड़ता है, जिससे आपकी सैलरी राशि कम हो जाती है. इनकम टैक्स विभाग लागू स्लैब रेट के मुताबिक भारत में सैलरी पर टैक्स लगाता है. अगर आप ज्यादा सतर्क रहते हैं और एक साल में समझदारी से निवेश के फैसले लेते हैं तो संभव है कि सैलरी पर इनकम टैक्स कम हो जाए. सही सैलरी स्ट्रक्चर चुनकर और इंश्योरेंस प्लान जैसे स्मार्ट निवेश का चयन करके, आप सालाना अपनी बहुत सारी कमाई बचा सकते हैं, जिससे आपके प्रियजनों को सुरक्षा मिलती है.
भारत में सैलरी पर टैक्स बचाना
- अपनी सैलरी को रीस्ट्रक्चर करें: सामान्य प्रवृत्ति के तौर पर, आप अपने पुरे सीटीसी पर ज़्यादा ध्यान देते हैं और अपने सैलरी स्ट्रक्चर के बारे में भूल जाते हैं. हो सकता है कि आपकी पूरी सैलरी आपके नियंत्रण में न हो, लेकिन आप अपनी सैलरी को व्यवस्थित करने के तरीके को नियंत्रित कर सकते हैं, ताकि सैलरी पर इनकम टैक्स कम से कम किया जा सके. आमतौर पर, आपकी सैलरी में चार घटक शामिल होते हैं — बेसिक, अलाउंस, अनुलाभ और रिटायरमेंट के लाभ/योगदान. आपकी बेसिक सैलरी या हाथ में आई सैलरी पर पूरी तरह से टैक्स लगता है. इसलिए, अगर आप अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा इस राशि के तहत रखते हैं, तो हो सकता है कि आप एक बड़ी राशि घर ले जाएँ, लेकिन आपको ज़्यादा टैक्स भी देना होगा.
बजट 2019 में 50,000/- रुपये की मानक कटौती प्रदान की गई, जिसके कारण परिवहन और चिकित्सा प्रतिपूर्ति जैसे व्यक्तिगत भत्ते को हटा दिया गया. इसके अलावा, आप अपनी सेलरी संरचना में ज़्यादा अनुलाभ चुनकर और एनपीएस (नेशनल पेंशन स्कीम) और पीएफ (प्रोविडेंट फंड) जैसी अपनी रिटायरमेंट सेविंग्स में ज़्यादा योगदान देकर अपने टैक्स का बोझ कम कर सकते हैं.
- होम लोन पर टैक्स में बेनिफिट पाएं: अगर आपके पास होम लोन है तो आप सैलरी पर लगने वाले इनकम टैक्स को कम कर सकते हैं। कई सरकारी योजनाएं, जैसे कि प्रधानमंत्री आवास योजना, भारत में आवास को अधिक किफायती बनाने की दिशा में काम करती हैं। इसके अलावा, आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80C होम लोन की मूल राशि के पुनर्भुगतान के लिए ₹1.5 लाख तक की कर कटौती की पेशकश करती है। साथ ही, धारा 24(बी) सालाना 2 लाख रुपये तक के होम लोन के ब्याज पर कर छूट देती है।
अगर आप नई खरीदी गई प्रॉपर्टी को किराए पर देते हैं, तो नए घर के लिए गए होम लोन पर लगने वाले ब्याज़ को किराए से होने वाली इनकम पर लगाया जा सकता है. इससे आपको अपनी महत्वपूर्ण राशि की बचत होगी.
- किराए के परिसर के लिए क्लेम करने से छूट: इनकम टैक्स एक्ट की धारा 10(13A) में आपको एचआरए (हाउस रेंट अलाउंस) के तहत टैक्स में छूट मिलती हैबशर्ते आप किराए के घर में रहें. आपके एचआरए की कैलकुलेशन तीन घटकों के न्यूनतम मूल्य के रूप में की जाती है — सालाना एचआरए, मेट्रो और नॉन -मेट्रो शहर में रहने के मामले में सालाना सैलरी का 50% और 40% और बेसिक सैलरी का 10%. अगर आपकी मंथली सैलरी में एचआरए शामिल नहीं है, तो आप धारा 80GG के तहत सालाना रेंटल छूट का फ़ायद उठा सकते हैं.
- सही टैक्स व्यवस्था के लिए अप्लाई करें: आपके द्वारा चुनी गई टैक्स व्यवस्था से भी आपकी टैक्स राशि पर बहुत असर पड़ता है. बजट 2020 में, एक नई टैक्स व्यवस्था शुरू की गई, जहाँ दरों में कटौती की गई. टैक्स स्लैब अलग-अलग करदाताओं के लिए फिर से डिज़ाइन किए गए, जिन्होंने बिना किसी कटौती और छूट का विकल्प चुना.
एक टैक्सपेयर के तौर पर, आपके पास दो विकल्प हैं, आप पिछली टैक्स व्यवस्था के मुताबिक टैक्स देना जारी रख सकते हैं या बिना किसी कटौती और छूट के नई टैक्स व्यवस्था का विकल्प चुन सकते हैं. आपको यह तय करना चाहिए कि आपकी तनख्वाह और वित्तीय स्थिति के हिसाब से दोनों में से कौन सी व्यवस्था सबसे अच्छी है. उदाहरण के लिए, अगर आपको सालाना ₹8 लाख या ₹10 लाख की सालाना सेलरी मिलती है, तो आप पुरानी टैक्स व्यवस्था की तुलना में नई टैक्स व्यवस्था में ज़्यादा बचत कर सकते हैं.
विवरण |
पुरानी टैक्स व्यवस्था के अनुसार इनकम टैक्स (₹ में) |
नई टैक्स व्यवस्था के मुताबिक इनकम टैक्स (₹ में) |
सालाना सैलरी |
8,00,000/10,00,000 |
8,00,000/10,00,000 |
80C कटौती |
1,50,000 |
NIL |
नेट टैक्सेबल इनकम |
6,50,000/8,50,000 |
8,00,000/10,00,000 |
नेट इनकम टैक्स (लागू टैक्स स्लैब दर के मुताबिक)
*स्वास्थ्य और शिक्षा सेस के लिए ख़ास |
75,400/85,800 |
46,800/78,000 |
- समझदारी से निवेश करें: अपनी सैलरी पर टैक्स बचाने का एक शानदार तरीका यह है कि आप अपने पैसे को अच्छे निवेश विकल्पों में निवेश करें और टैक्स बेनिफिट पाने के लिए उन्हें सालाना घोषित करें. कैपिटल मार्किट और सरकार द्वारा अनिवार्य स्कीम निवेश ज्यादा रिटर्न देते हैं, जिससे आप बड़ी संपत्ति इकट्ठा करने के साथ-साथ टैक्स भी बचा सकते हैं.
इन तरीकों के साथ, आप भारत में सैलरी पर टैक्स आसानी से कम कर सकते हो. हालाँकि, अपने टैक्स बचाने वाले निवेश इंस्ट्रूमेंट चुनते समय और अपनी सेलरी के घटकों को स्ट्रक्चर करते समय सावधानी बरतना ज़रूरी है.

यूलिप (यूनाइटेड लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान) निवेश के सबसे प्रतिष्ठित विकल्पों में से एक है. यूलिप पॉलिसी एक ही प्लान में इंश्योरेंस और निवेश का दोहरा फ़ायदा देती है.
यूलिप प्लान में, आपके द्वारा भुगतान किए जाने वाले प्रीमियम के एक हिस्से का इस्तेमाल आपको सुरक्षित इंश्योरेंस कवर देने के लिए किया जाता है, जबकि बाकी प्रीमियम आपकी पसंद, वित्तीय उद्देश्य और जोखिम उठाने की क्षमता के हिसाब से मार्केट फंड में निवेश किए जाते हैं.
ज़्यादा यूलिप रिटर्न के अलावा, आपको टैक्सेशन के पर्याप्त बेनिफिट भी मिलते हैं. धारा 80C के तहत, पॉलिसी के लिए आप जो प्रीमियम चुकाते हैं, उस पर ₹1.5 लाख तक की छूट मिलती है. इसके अलावा, धारा 10(10D) के तहत, कुछ खास शर्तों के पूरा होने पर, यूलिप रिटर्न सहित डेथ बेनिफिट और यूलिप प्लान की मैच्योरिटी से मिलने वाले बेनिफिट पर टैक्स में छूट दी जाती है.
हालांकि, टाटा एआईए लाइफ इंश्योरेंस की यूलिप पॉलिसीज़ से आप अपनी पसंदीदा फ्रीक्वेंसी के अनुसार अपने प्रीमियम का भुगतान कर सकते हैं — एकल, वार्षिक, अर्ध-वार्षिक, तिमाही या मासिक रूप से. इससे आपका वित्तीय बोझ कम हो जाता है क्योंकि आप अपनी वित्तीय ज़रूरतों के हिसाब से फ़्रीक्वेंसी चुन सकते हैं और फिर भी वही टैक्स बेनिफिट पा सकते हैं.
टाटा एआईए लाइफ़ यूलिप के साथ, आपको मार्केट से जुड़े रिटर्न के साथ-साथ इंश्योरेंस कवर का बेनिफिट भी मिलता है, साथ ही आपको अपने निवेश में बढ़ोतरी मिलती है. इन प्लान से आपको निवेश की ज़रूरतों और जोखिम उठाने की ज़रूरतों के हिसाब से कई तरह के फ़ंड में निवेश करने की सुविधा मिलती है. समय के साथ आपको अपने फ़ंड में लॉयलटी एडिशन्स भी मिलते हैं.
इस तरह के निवेश से आपको वर्तमान में टैक्सेशन बेनिफिट उठाने में मदद मिलती है और साथ ही आपको इंश्योरेंस कवर के सबल फायदे भी मिलते हैं, साथ ही आपके निवेश पर लंबी अवधि के रिटर्न भी मिलते हैं.
यह सलाह दी जाती है कि साल में पहले ही अपनी टैक्स प्लानिंग प्रोसेस शुरू कर दें, ताकि आप सैलरी पर जितना हो सके उतना इनकम टैक्स बचा सकें.
L&C/Advt/2021/May/0662
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