19-07-2022 |
इनकम टैक्स एक्ट के अनुसार, हर भारतीय नागरिक को एक वित्तीय वर्ष में ₹2,50,000 से ज़्यादा कमाने पर टैक्स देना होगा. जिस व्यक्ति पर टैक्स लगाया जाता है, उसे इनकम टैक्स अधिनियम, 1961 के तहत असेसी के रूप में जाना जाता है, जिसमें निम्नलिखित शामिल हैं:
एक सैलरीड व्यक्ति
एक सेल्फ-एम्प्लॉयड व्यक्ति या किसी प्रोप्राइटरशिप फर्म का मालिक
हिंदू अविभाजित परिवार
रजिस्ट्रार ऑफ़ कंपनीज़ के अधीन एक रजिस्टर्ड कंपनी
एक पार्टनरशिप फर्म
एक लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप फर्म
व्यक्तियों का संघ/व्यक्तियों का समूह
एक कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति, जैसा कि इनकम टैक्स एक्ट द्वारा परिभाषित किया गया है
सेल्फ-एम्प्लॉयड कौन होता है?

सेल्फ-एम्प्लॉयमेंट के कई फायदे हैं. आपको अपनी इच्छा के अनुसार बिजनेस ऑपरेट करने की आज़ादी है. आप अपनी एंटिटी के मालिक हैं और प्रॉफिट के एकमात्र बेनिफिशियरी हैं. इनकम टैक्स के नियमों के तहत आप सेल्फ-एम्प्लॉयड की केटेगरी में आते हैं, अगर:
आप एंटिटी के साथ बिना किसी औपचारिक अनुबंध के अन्य बिजनेस को सेवाएँ ऑफ़र करते हैं.
आप किसी भी बिजनेस में ट्रेड, कॉमर्स, निर्माण या इसी तरह की अन्य गतिविधियों में व्यस्त हैं.
सेल्फ-एम्प्लॉयड निर्धारिती वह व्यक्ति होता है, जिसे किसी ऑर्गनाइजेशन से एक निश्चित इनकम नहीं मिलती है.
सेल्फ-एम्प्लॉयड लोगों के लिए इनकम टैक्स “व्यवसाय या पेशे से लाभ” के तहत लगाया जाता है. जिस पेशा शब्द को इस अधिनियम के तहत परिभाषित नहीं किया गया है, उसमें वोकेशन भी शामिल है जिसमें एक डॉक्टर, एक आर्किटेक्ट, एक पेंटर, एक लेखक आदि शामिल हैं.
अगर आप सेल्फ-एम्प्लॉयड हैं, तो आपको कितना टैक्स देना पड़ता है?
वरिष्ठ और अति वरिष्ठ नागरिकों, हिंदू अविभाजित परिवार, एसोसिएशन ऑफ़ पर्सन, व्यक्तियों के निकाय या कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति के अलावा अन्य व्यक्तियों के लिए, सेल्फ-एम्प्लॉयड टैक्स इस प्रकार हैं:
कर योग्य इनकम (रुपये में) |
टैक्स की दर (प्रतिशत में) |
₹2.5 लाख तक |
कुछ नहीं |
₹2.5 - ₹5 लाख |
5% |
₹5 - ₹10 लाख |
20% |
₹10 लाख और उससे ज्यादा |
30% |
60-80 वर्ष की आयु के व्यक्तियों के लिए,सेल्फ-एम्प्लॉयड टैक्स इस प्रकार हैं:
टैक्स योग्य इनकम (रुपये में) |
टैक्स की दर (प्रतिशत में) |
₹3 लाख तक |
कुछ नहीं |
₹3 - ₹5 लाख |
5% |
₹5 - ₹10 लाख |
20% |
₹10 लाख और उससे ज्यादा |
30% |
80 वर्ष की आयु के व्यक्तियों के लिए,सेल्फ-एम्प्लॉयड टैक्स इस प्रकार हैं:
टैक्स योग्य इनकम (रुपये में) |
टैक्स की दर (प्रतिशत में) |
₹5 लाख तक |
कुछ नहीं |
₹5 - ₹10 लाख |
20% |
₹10 लाख और उससे ज्यादा |
30% |
इनकम टैक्स अधिनियम, 1961 के तहत इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग
इनकम टैक्स रिटर्न-4 (आईटीआर-4) फाइल करके, आप बिज़नेस के दौरान किए गए खर्चों में से टैक्स कटौती का क्लेम कर सकते हैं. इसमें बिज़नेस के लिए लिए गए लोन पर ब्याज, एम्प्लॉई के लिए बीमा और एसेट्स का डेप्रिसिएशन भी शामिल है. लेकिन ख़र्चे दिखाने के लिए कानूनी प्रमाण होना चाहिए.
आईटीआर-4S फाइल करके, अगर आपके पेशे से इनकम एक वित्तीय वर्ष में ₹50 लाख से कम है, तो आप अधिनियम की धारा 44DA के तहत अनुमानित टैक्स प्रणाली का विकल्प चुन सकते हैं. इस तरीके से, आपके खर्चों को ग्रॉस इनकम का 50% लिया जाता है, जबकि बाकी 50% पर टैक्स लगाया जाता है. खर्च दिखाने के लिए अकाउंट बुक मेंटेन करने की जरूरत नहीं है. यह विकल्प वोलंटरी है, और यदि आप अनुमानित विधि का विकल्प नहीं चुनना चाहते हैं, तो आप सामान्य कर फाइलिंग चुन सकते हैं.
यदि आपके बिजनेस का टर्नओवर एक वित्तीय वर्ष में 2 करोड़ रुपये या उससे कम है, तो इनकम टैक्स अधिनियम की धारा 44AD के तहत अनुमानित टेक्सेसेशन लागू होता है. आपके बिज़नेस से होने वाली न्यूनतम इनकम को ग्रॉस रिसीप्ट के 8% के रूप में लिया जाता है. लेकिन, अगर आपको डिजिटल मोड में भुगतान मिलता है, तो डिजिटल रिसीप्ट का 6% आपकी न्यूनतम टैक्स योग्य इनकम होती है.
अगर आप किसी खास वित्तीय वर्ष के लिए अनुमानित टैक्सेशन चुनते हैं, तो आप अगले पांच सालों के लिए रेगुलर आईटीआर फाइलिंग नहीं कर सकते. दूसरी ओर, अगर आप किसी वित्तीय वर्ष में स्कीम से बाहर निकलते हैं, तो आप अगले वित्तीय वर्ष के लिए अनुमानित स्कीम के तहत अपना रिटर्न फाइल नहीं कर सकते.
फ्रीलांसर्स के लिए इनकम टैक्स रिटर्न आईटीआर-4 या आईटीआर-3 के जरिए फाइल किया जा सकता है. अगर कोई सैलरीड व्यक्ति नौकरी के अलावा फ्रीलांसिंग करता है तो आईटीआर फॉर्म भरना जरूरी है. अनुमानित कराधान योजना अधिनियम की धारा 44ADA के तहत निर्धारित बिजनेस में काम करने वाले फ्रीलांसरों पर भी लागू होती है.
अकाउंट्स की ऑडिट
अगर आप सेल्फ-एम्प्लॉयड पेशेवर हैं और एक वित्तीय वर्ष में ग्रॉस इनकम के तौर पर ₹50 लाख या उससे अधिक कमाते हैं, तो आपको चार्टर्ड अकाउंटेंट से अपने अकाउंट का ऑडिट करवाना होगा. साथ ही, आपको ऑडिट रिपोर्ट इनकम टैक्स विभाग को सौंपनी होगी.
अगर आप किसी बिज़नेस के मालिक हैं, जिसकी आय ₹2 करोड़ से अधिक है, तो आपको अकाउंट ऑडिट के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट को एक खास फ़ॉर्मेट में असाइन करना होगा.
हालांकि, अगर आप अनुमानित टेक्सेशन का तरीका नहीं चुनते हैं, तो आपको चार्टर्ड अकाउंटेंट से अपने अकाउंट का ऑडिट करवाना होगा, भले ही इनकम कितनी भी हो.
लागू सरचार्ज
अगर आपकी इनकम ₹50 लाख से ज़्यादा है, तो टैक्स देयता के 10% का सरचार्ज देय टैक्स के अलावा देना होगा.
अगर आमदनी ₹1 करोड़ से ज़्यादा है, तो सरचार्ज टैक्स देयता का 15% है.
फर्म और लिमिटेड लायबिलिटी पाटनर्शिप के मामले में, जिनकी टैक्स योग्य इनकम ₹1 करोड़ तक की होती है, टैक्स देयता के 30% पर सरचार्ज लिया जाता है. ₹1 करोड़ से ज़्यादा की टैक्स योग्य इनकम के लिए, सरचार्ज की कैलकुलेशन 12% है.
अगर घरेलू कंपनियों के मामले में ₹1 करोड़ से ज़्यादा इनकम होती है, तो सरचार्ज की कैलकुलेशन 7% है. हालांकि, अगर इनकम ₹10 करोड़ से ज़्यादा होती है, तो सरचार्ज 10% है.
सेल्फ-एम्प्लॉयड के लिए आईटीआर की ड्यू डेट
इनकम टैक्स एक्ट के अनुसार, आपको हर साल 31 जुलाई से पहले अनुमानित टैक्सेशन (टैक्स ऑडिट लागू नहीं) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना होगा. सामान्य इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए (ऑडिट लागू है), हर साल 31 अक्टूबर की ड्यू डेट होती है.
टैक्स* बेनिफिट
इनकम टैक्स एक्ट में कुछ निवेशों और खर्चों पर टैक्स छूट दी गई है. इनमें शामिल हैं:
लाइफ इंश्योरेंस प्लान्स
रिटायरमेंट प्लान्स
प्रोविडेंट फंड
हेल्थ इंश्योरेंस प्लान
किसी विकलांग आश्रित के इलाज या रख-रखाव का खर्च
ख़ास मेडिकल ट्रीटमेंट पर होने वाले ख़र्चे
एजुकेशन या होम लोन पर दिया जाने वाला ब्याज़
निष्कर्ष
अब आपको पता है कि सेल्फ-एम्प्लॉयड लोगों के लिए टैक्सेशन सिस्टम कैसे काम करता है. इसलिए, अगर आप सेल्फ-एम्प्लॉयड हैं और टैक्स के दायरे में आते हैं, तो आपको टैक्स के अनुरूप होना चाहिए और कभी भी टैक्स से बचना नहीं चाहिए. लेकिन आप टर्म इंश्योरेंस प्लान लेकर टैक्स* देयता को कम कर सकते हैं, जो आपकी अनुपस्थिति में आपके परिवार की वित्तीय ज़रूरतों को पूरा करेगा. इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80CC के तहत, टर्म पॉलिसी के लिए आप जो प्रीमियम चुकाते हैं, उस पर टैक्स की छूट दी जाती है. इसके अलावा, अगर प्रीमियम सुनिश्चित राशि के 10% से अधिक नहीं होता है, तो धारा 10 (10D) के तहत डेथ बेनिफिट पर टैक्स छूट दी जाती है.
इसलिए, टाटा एआईए टर्म पॉलिसी के साथ निवेश शुरू करें और अपने प्रियजनों के भविष्य को अभी सुरक्षित करें!
L&C/Advt/2022/Jul/1567
मौजूदा पॉलिसी के लिए
नई पॉलिसी के लिए